Dheeraj Chauhan

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Balloons for astronauts became the home ! News

Posted by cdheeraj21 on February 23, 2013 at 12:15 AM Comments comments (1)

लॉस वेगास।

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में अंतरिक्ष यात्रियों के ठहरने के लिए पहले बने भारी भरकम धातु के बॉक्स को हल्के गुब्बारेनुमा घर में बदलने की तैयारी की जा रही हैं।

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक निजी अंतरिक्ष कंपनी बिगेलो एयरोस्पेस से हाथ मिलाया है। ताकि कम लागत में अंतरिक्ष यात्रियों को आवास समेत बेहतर सुविधाएं मुहैया कराई जा सकें। उत्तरी लॉस वेगास स्थित अंतरिक्ष कंपनी बिगेलो ने गत बुधवार एक सम्मेलन के बाद अपने बयान में कहा, 17 करोड़ 80 लाख डॉलर की लागत की परीक्षण परियोजना के तहत गुब्बारे के आकार के एक कमरे को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा। तीन मीटर व्यास वाले इस कमरे को दो मीटर की ट्यूब में बदल दिया जाएगा। नासा के इंजीनियर ग्लेन मिलन ने कहा कि यदि अंतरिक्ष स्टेशन में यह मोड्यूल दो साल तक टिकाऊ रहता है, तो इसे चंद्रमा और मंगल अभियानों के तहत अंतरिक्ष यात्रियों के आवास के रूप में इस्तेमाल किए जाने पर विचार किया जाएगा। नासा की योजना वर्ष 2015 इस गुब्बारेनुमा घर को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में स्थापित करने की है। मिलन ने बताया कि नई तकनीक के जरिए अंतरिक्ष यात्रियों के लिए ऐसे एक से अधिक कमरे बनाए जा सकेंगे। यह अन्य विकल्पों के मुकाबले सस्ता है और इसे जल्द ही तैयार किया जा सकेगा।

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Junkyard becoming south pole! News

Posted by cdheeraj21 on February 23, 2013 at 12:00 AM Comments comments (0)

बर्लिन।

मानवीय प्रयोगों और परीक्षणों के चलते दक्षिणी ध्रुव कूड़ाघर में तब्दील होता जा रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक विभिन्न प्रकार के अध्ययन के सिलसिले में दक्षिणी ध्रुव पर जाने वाले शोधकर्ता वहा कचरा, तेल के डिब्बे, कार की बैट्री और कई खतरनाक रसायन छोड़ आते हैं। इससे यह स्थान कूड़ाघर बनता जा रहा है।

इस रिपोर्ट के सह-लेखक यूनिवर्सिटी जेना के हैंस यूलरिक पीटर के मुताबिक अंटार्कटिक में यह एक आम समस्या बनती जा रही है। उसमें भी किंग जॉर्ज आइलैंड की स्थिति सबसे ज्यादा सोचनीय है। यह आइलैंड अंटार्कटिक से 120 किमी की दूरी पर है। यह आइलैंड फाइल्ड्स पेनिनसुला के पास ही है, जहा 1983 से अब तक नियमित रूप से परिस्थिति विज्ञानी शोध कर रहे हैं। फाइल्ड्स पेनिनसुला, अंटार्कटिक के बर्फ मुक्त सबसे बड़े भू-भागों में से एक है जहा के वातावरण में काफी विभिन्नता पाई जाती है। यूनिवर्सिटी जेना के मुताबिक 30 सालों में दक्षिणी धु्रव पर मानव का दखल काफी बढ़ा है। इसके चलते यहा की पारिस्थितिकी तंत्र पर काफी बुरा प्रभाव पड़ रहा है।

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Dunia News

Posted by cdheeraj21 on February 22, 2013 at 11:50 PM Comments comments (0)

दुनिया के लोगों को बिना किसी रोक-टोक के अपनी बात कहने का प्लेटफॉर्म देने वाला फेसबुक इस फरवरी में नौ साल का हो गया। इस मौके पर जानते हैं आपके पसदीदा दोस्त बन गए फेसबुक की लोकप्रियता और इसके जन्म की कहानी..

-अन्ना हजारे और अरविद केजरीवाल का आदोलन हो या मिस्त्र, लीबिया सहित दुनिया के तमाम देशों में होने वाले आदोलन, पिछले कुछ सालों में सत्ता और सरकार द्वारा खड़ी की गई तमाम बाधाओं के बावजूद लोगों को जोड़ने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है फेसबुक ने।

-दिल्ली में 16 दिसबर की घटना के विरोध में जंतर-मतर, इंडिया गेट से लेकर विजय चौक तक जो जन सैलाब उमड़ा, उसके पीछे इस सोशल मीडिया की ताकत ही थी। इसके जरिए ही हर कोई अपनी बात बेरोक-टोक रख रहा था।

-आज दुनिया में फेसबुक यूजर्स की सख्या एक अरब से ऊपर पहुंच गई है। अकेले भारत, ब्राजील और इजराइल में इसका इस्तेमाल करने वालों की सख्या 95.5 करोड़ से अधिक है।

-दुनिया भर में रोजाना फेसबुक का इस्तेमाल करने वालों की सख्या 52.5 करोड़ से भी अधिक है।

-भारत में हर माह फेसबुक का नियमित इस्तेमाल करने वालों की सख्या 6 करोड़ से ऊपर पहुंच गई है।

स्थापना से लोकप्रियता तक

-फेसबुक की स्थापना मार्क जुकरबर्ग ने अपने साथियों डस्टिन मॉस्कोवित्ज, क्रिस ह्यूज और एडुअर्ड सावेरिन के साथ मिलकर की थी। -जुकरबर्ग का जन्म 14 मई, 1984 को हुआ। उन्होंने न्यूयॉर्क में मिडिल स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही प्रोग्रामिग शुरू कर दी थी।

-90 के दशक में उनके पिता ने उन्हें बेसिक प्रोग्रामिग के बारे में बताया। 1995 के आसपास सॉफ्टवेयर डेवलपर डेविड न्यूमैन उनके ट्यूटर बने और इसी दौरान मार्क ने प्रोग्रामिग में ग्रेजुएशन किया।

-4 फरवरी, 2004 को जुकरबर्ग ने अपनी डॉर्मिटरी से ही फेसबुक लॉन्च किया। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट जुकरबर्ग ने पहले इसे सिर्फ एक कॉलेज नेटवर्क के रूप में आरंभ किया था।

-फेसबुक लॉन्च करने की प्रेरणा जुकरबर्ग को फिलिप्स एग्जिटर एकेडमी से मिली थी, जिसने अपनी स्टूडेंट डायरेक्ट्री 'द फोटो अड्रेस बुक' के नाम से पब्लिश की, जिसे स्टूडेंट 'द फेसबुक' कहा करते थे।

-हार्वर्ड के बाद जुकरबर्ग ने फेसबुक का दायरा स्टैनफोर्ड, डार्टमाउथ, कोलबिया, न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी, कॉर्नेल, ब्राउन और येल यूनिवर्सिटी तक बढ़ाया। यह काम उन्होंने अपने दोस्त मॉस्कोवित्ज के साथ मिलकर किया।

-फेसबुक के फाउंडर व सीईओ मार्क जुकरबर्ग के जीवन पर फिल्म भी बनी है, 'सोशल नेटवर्क', जिसने तीन ऑस्कर अवॉर्ड जीते थे।

-बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए अक्टूबर 2007 में माइक्रोसॉफ्ट ने भी फेसबुक में हिस्सेदारी खरीदी।

-फेसबुक ने अपने यूजर्स को लुभाने के लिए उत्तरी अमेरिका में फेसबुक कार्ड और आईफोन पर वॉयस कालिग जैसा एडवास फीचर भी पेश किया है।

-आज फेसबुक सिर्फ युवाओं के बीच ही पॉपुलर नहीं है, बल्कि दुनिया की तमाम कंपनिया अपने कर्मचारियों की भर्ती करने से पहले उनके फेसबुक पेज से भी उनके बारे में जानकारिया जुटाने लगी हैं।

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vasington news

Posted by cdheeraj21 on February 22, 2013 at 11:45 PM Comments comments (0)

वाशिगटन। मिलिए पृथ्वी के सबसे जीवट प्राणी वाटर बीयर से। धरती पर कोई आफत आए जैसे ज्वालामुखी फटे, भूकंप आए, कोई उल्कापिंड टकराए या फिर कोई और प्राकृतिक आपदा हो जिसमें इंसान समेत किसी भी अन्य जीव का समूल विनाश हो सकता है, उस विषम परिस्थिति में भी इस जीव यानी वाटर बीयर का अस्तित्व कायम रहेगा। इतना ही नहीं अमूमन 200 साल की उम्र वाला यह जलीय जीव खौलते और जमे हुए पानी में भी जीवित रह सकता है। यह अंतरिक्ष में जहा वायु नहीं यह वहा भी जीवित रह सकता है। यह परमाणु बम विस्फोट का दंश भी झेल सकता है।

अभी तक आम धारणा के तहत पृथ्वी पर कॉकरोच यानी तिलचट्टे को ही हर माहौल में खपने वाला जीव माना गया था। लेकिन अब अमेरिका के टेनेस्सी प्रात में स्थित रोन पहाड़ियों में पहली बार पाया गया यह सूक्ष्म जीव टारडीग्रेड दरअसल दुनिया के हर कोने में पाया जाता है। दुनिया की सबसे ऊंची पहाड़ियों से लेकर सबसे गहरे महासागर तक में यह पाया जाता है। कई खंडों में पाए जाने वाले इस नन्हें जीव की पूरी दुनिया में 900 प्रजातिया हैं। हालाकि देखने में जरा भी अच्छा नहीं है और आमतौर पर इसे देखकर जीव शायद ही कोई माने।

एक मिलीमीटर लंबा टारडीग्रेड या वाटर बीयर को दरअसल जमाया, सुखाया, उसे विकिरण में रखा जा सकता है। वह हर हाल में जीवित रहेगा। वाटर बीयर -457 जितने ठंडे तापमान और 357 डिग्री तक की अकल्पनीय गर्म तापमान तक में जीवित रह सकते हैं। वह 5700 ग्रे परमाणु विकिरण भी सहन कर सकते हैं। आमतौर पर इंसान व अन्य जीव 10-20 ग्रे परमाणु विकिरण में ही मर जाते हैं। यह जीव दशकों तक बिना पानी के रह सकता है। साथ ही वह अंतरिक्ष में यानी बिना वायुमंडल के भी जीवित रहता है। इन सब तकलीफों को झेलने के बाद भी इनकी आयु 200 साल होती है। लिहाजा अगर पृथ्वी से कभी मानवजाति का अंत भी हुआ तो यह जीव रहेंगे।

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????????? News

Posted by cdheeraj21 on February 22, 2013 at 11:40 PM Comments comments (0)

न्यूयॉर्क।

अक्सर लोग रास्ते में बैठे भिखारी की या तो उपेक्षा करते हैं या कुछ फुटकर पैसे देकर आगे बढ़ जाते हैं। कुछ ऐसा ही यहां की एक युवती ने भी किया। उसने एक सड़क किनारे बैठे भिखारी के कटोरे में पैसे डाले और आगे बढ़ गई। लेकिन इसी दौरान उसकी सगाई की कीमती अंगूठी भी कटोरे में सरक गई। थोड़ी देर बाद जब भिखारी को चमकती अंगूठी दिखी तो वह मामले को समझ गया। अंगूठी लौटाने के लिए फौरन महिला की तलाश करने लग गया। लेकिन जब वह नहीं मिली तो उसने अंगूठी अपने पास सुरक्षित रख ली।

अगले दिन वह उसी सड़क पर उस युवती का इंतजार करने लगा। थोड़ी देर बाद जब वह आई तो दौड़कर अंगूठी वापस कर दी। आश्चर्यचकित युवती ने खुश होकर उसको कुछ ईनाम देने की कोशिश की लेकिन उसने विनम्रता से आग्रह को ठुकरा दिया।

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Aligarh news

Posted by cdheeraj21 on February 22, 2013 at 1:00 AM Comments comments (0)

वरिष्ठ संवाददाता, अलीगढ़ : हैदराबाद में हुए धमाकों की खबर मिलते ही डीआइजी ने अलीगढ़ रेंज में अलर्ट घोषित कर दिया।

 

एसएसपी के निर्देश पर अलीगढ़ में बस अड्डों और रेलवे स्टेशन पर चेकिंग कराई गई। संदिग्ध व लावारिस वस्तुओं पर नजर रखी जा रही है।

 

हैदराबाद में धमाकों की खबर मिलते ही शासन ने अलीगढ़ समेत प्रदेश के सभी कमिश्नरों, डीएम, डीआइजी और एसएसपी को सतर्कता के निर्देश जारी कर दिये। यहां के डीआइजी प्रकाश डी ने बताया कि अलीगढ़ रेंज में अलर्ट घोषित कर दिया गया है।

 

धमाकों की निंदा

 

अलीगढ़ : अलीगढ़ उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल मिश्रा गुट के महामंत्री भूपेंद्र वाष्र्णेय ने हैदराबाद में हुए धमाकों की निंदा की और कहा कि अशांति फैलाने वाले देश के दुश्मन हैं। कंछल गुट के महामंत्री सौरभ अग्रवाल ने कहा कि अराजक तत्वों की इन हरकतों से देशवासी डरने वाले नहीं। व्यापारी नेता मानव महाजन, जयगोपाल वीआइपी, शमन माहेश्वरी, पवन खंडेलवाल, संदीप रंजन, अजय लिथो, भुवनेश टिंबर, ओम प्रकाश मास्टर, प्रमोद अग्रवाल हैदराबाद धमाकों को शर्मनाक बताया है।

 

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